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Gandhi Jayanti: गांधी जयंती पर बिहार में 44 बंदियों को मिली रिहाई, 1,820 पीड़ित परिवारों को 3.86 करोड़ की सहायता

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | गांधी जयंती पर बिहार में 44 बंदियों को मानवीय आधार पर रिहाई, 1,820 अपराध पीड़ित परिवारों को 3.86 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता।

पटना, 2 अक्टूबर: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर देशभर में सत्य, अहिंसा और शांति के उनके विचारों को याद किया जा रहा है। गांधी के संघर्ष की सबसे बड़ी पहचान यह रही कि उन्होंने बिना हिंसा का रास्ता अपनाए ब्रिटिश शासन के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने भी गांधी के व्यक्तित्व में उस शांत लेकिन प्रभावशाली शक्ति को महसूस किया था, जो बिना शोर किए बड़े बदलाव की जमीन तैयार करती है।

2 अक्टूबर को गांधी जयंती के साथ संयुक्त राष्ट्र का अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस भी मनाया जाता है। इस अवसर पर नई दिल्ली के राजघाट सहित देशभर में बापू को श्रद्धांजलि दी जा रही है। गांधी के सत्य, अहिंसा, सादगी और मानवता के विचारों को आज भी सामाजिक जीवन में प्रासंगिक माना जाता है।

बिहार में 44 बंदियों को मिलेगी आजादी

गांधी जयंती के अवसर पर बिहार सरकार ने मानवीय आधार पर अलग-अलग जेलों में बंद 44 बंदियों को कारामुक्त करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय राज्य बंदी परिहार कमेटी की अनुशंसा के आधार पर लिया गया है।

रिहाई पाने वालों में लंबे समय से कारावास की सजा काट रहे बुजुर्ग बंदियों के साथ गंभीर बीमारी से पीड़ित बंदी भी शामिल हैं। सरकार की ओर से इसे मानवीय संवेदना, सामाजिक पुनर्वास और जनकल्याण की भावना से जुड़ा कदम बताया गया है।

बुजुर्ग बंदियों की संख्या अधिक

रिहाई पाने वाले बंदियों में बड़ी संख्या उम्रदराज लोगों की है। इनमें दो बंदी 90 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। वहीं 8 बंदी 80 वर्ष से अधिक आयु के हैं, जबकि 20 बंदी 70 से 80 वर्ष के बीच की उम्र के बताए गए हैं।

एक गंभीर बीमारी से पीड़ित बंदी को भी मानवीय आधार पर रिहा किया जा रहा है। लंबे समय से जेल में रहने वाले इन बंदियों के लिए यह फैसला परिवार और समाज के बीच दोबारा लौटने का अवसर लेकर आया है।

93 वर्षीय रामबृक्ष समेत कई बुजुर्ग होंगे रिहा

रिहाई पाने वालों में रोहतास जेल में बंद 93 वर्षीय रामबृक्ष कोइरी भी शामिल हैं। इसके अलावा मधेपुरा जेल से योगेश्वर यादव और 84 वर्षीय हरिवंश राम, 82 वर्षीय रामाशीष यादव समेत अन्य बंदियों को भी कारामुक्त किया जा रहा है।

रिहा होने वालों में एक महिला बंदी भी शामिल हैं, जिन्होंने पूर्णिया जेल में करीब दो दशक की सजा पूरी की है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे सत्यनारायण सिंह और पंकज गुप्ता को भी मानवीय आधार पर रिहाई दी जा रही है।

अपराध पीड़ित परिवारों को भी मिलेगी आर्थिक मदद

गांधी जयंती के अवसर पर सरकार की ओर से अपराध से प्रभावित परिवारों को भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। करीब 1,820 लाभार्थी परिवारों के बीच 3 करोड़ 86 लाख रुपये की राशि वितरित की जाएगी।

इस सहायता का उद्देश्य अपराध की घटनाओं से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहारा देना है। सरकार की योजना के तहत पात्र परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

गांधी के विचारों से जुड़ा मानवीय संदेश

गांधी जयंती पर बंदियों की मानवीय आधार पर रिहाई और पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता का फैसला सामाजिक पुनर्वास और मानवीय संवेदना के नजरिए से महत्वपूर्ण है। वृद्ध और असहाय बंदियों को लंबे कारावास के बाद परिवार के बीच लौटने का अवसर मिलेगा, वहीं अपराध से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

आज ही याद किए जा रहे लाल बहादुर शास्त्री

2 अक्टूबर को देश के दूसरे महत्वपूर्ण जननेता और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की भी जयंती मनाई जाती है। वर्ष 1904 में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में जन्मे शास्त्री सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा के लिए याद किए जाते हैं।

इस तरह 2 अक्टूबर का दिन भारतीय इतिहास में दो ऐसे व्यक्तित्वों की स्मृति से जुड़ा है, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में सादगी, अनुशासन और राष्ट्रसेवा को महत्वपूर्ण स्थान दिया। गांधी जयंती पर देशभर में जहां अहिंसा और सत्य के संदेश को दोहराया जा रहा है, वहीं बिहार में मानवीय आधार पर बंदियों की रिहाई और पीड़ित परिवारों को सहायता का कार्यक्रम सामाजिक संवेदना का संदेश दे रहा है।

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